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चुदाई के वो पन्द्रह दिन Part - 12 ( Hindi Sex Story )

अब तक आपने पढ़ा था कि मानकपुर से वापसी में मुझे गाड़ी में रवि सिंह चोद रहे थे. मैं रवि के ऊपर उनके लंड पर बैठ कर चुदने लगी तो पीछे से मेरी खुली गांड को देख कर राज अंकल मेरी गांड मारने की प्लानिंग करने लगे थे.
अब आगे..
जैसे ही फराज अंकल ने रवि से मेरी गांड मारने की बात कही, तो रवि बोले- अरे राज भाई बिल्कुल.. आप पूरा डाल दो.. इसको भी मजा आ जाएगा.
राज अंकल ने सीट पर चढ़कर मेरे कूल्हों को फैलाकर मेरी गांड के छेंद में जीभ डाल दी और चाटने लगे. फिर बहुत सारा थूक मेरी गांड के छेद में लगाकर मुझसे बोले कि सोनू तेरी गांड चोद दूं?
मैं बोली- हां अंकल, आपको कभी मना करूंगी.
अंकल बोले- बहुत अच्छी है तू मेरी सेक्सी डार्लिंग.. तुझे जिंदगी भर मैं अपना बनाकर रखूंगा.
अंकल ने मेरे कूल्हों को फिर से फैला कर उसमें अपना लंड टच कराया और फिर जोर से दबा के गांड में घुसा दिया. मुझे दर्द हुआ तो मैं अपनी आदत के मुताबिक़ चिल्लाई चीखी, पर दूसरे झटके में ही राज अंकल ने पूरा लंड घुसा दिया और पीछे से मेरे दूधों को पकड़ कर दबाने भी लगे.
अंकल मेरी गांड मारते हुए बोले- आह.. सोनू तू मस्त है.. सबसे कयामत तो तेरी यह मस्त गांड है. सच में बहुत मजा आ रहा है, मुझे तो इस शादी में आकर तेरे रूप में जन्नत मिल गई. तू जितने दिन रहेगी, मैं यहां से नहीं जाने वाला हूं. सोनू तेरे लिए एक से एक लंड मैं मैंनेज कर लूंगा.
अंकल मुझे जोर से चोदने लगे. अब मेरी चूत और गांड में लंड अन्दर बाहर हो रहे थे. मैं बिल्कुल पागल सी होने लगी. मैं रवि के होंठों को पकड़ के मुँह को चाटने लगी, चूसने लगी.
रवि बोले- तू बहुत मस्त है यार.. तेरा कोई जवाब नहीं.. तुझे कैसे बताएं कि तू कितनी मस्त है.. आह और ले पूरा लंड..
तभी जगत अंकल बोले- यार वहां बगल वाली कार में, जिसमें इसकी मम्मी है वह खड़ी है. लगता है वे लोग वन्द्या की चुदाई इसकी मम्मी को दिखा रहे हैं.
ये सुनकर मैं घबरा गई और बोली- प्लीज भगवान के लिए उन्हें हटाओ.. मम्मी मुझे ना देख पाएं.
तो जगत अंकल बोले- लगता है तेरा चेहरा देख तो नहीं पा रही है.. क्योंकि तेरा चेहरा इधर है, पर तेरी मम्मी कांच से झांक रही है.. उसको राज दिख रहा है कि वो चुदाई कर रहा है. हां उसे तेरी गांड तो पूरी चुदते हुए दिख रही है. तेरी मम्मी तेरे छेद देख रही है.
तभी मैं बोली- प्लीज कुछ भी करो मुझे यहां अब और नहीं करो. अगर उन्होंने देख लिया तो मैं मम्मी को मुँह दिखाने लायक नहीं रहूँगी.
तब जगत अंकल बोले- वो तेरा चेहरा तो नहीं देख सकती.. क्योंकि तू रवि के ऊपर है और पीछे से राज चढ़ा है.. पर हां वह यह जान गई है कि तेरी चुदाई चल रही है.
मैं बहुत घबराने लगी तो जगत उन गाड़ी वालों को इशारा करने लगे कि गाड़ी आगे बढ़ाओ.
वह गाड़ी चली गई, जगत अंकल ने मुझे बताया कि गाड़ी निकल गई.
फिर भी मैं बोलने लगी- अब मैं क्या करूं.. कैसे मम्मी के पास जाऊंगी कैसे नजर मिलाऊंगी.. वे सब देख चुकी हैं.. सब गड़बड़ हो गया.
मैं घबराने लगी, तभी रवि बोला कि वन्द्या तू चिंता मत कर.. कौन सी तेरी मम्मी सती सावित्री है, जो तुझे बोलेगी या डांटेगी. तुम बोल देना जैसी तुम हो वैसी ही हूं.. तेरी ही तो बेटी हूं. चिंता मत कर कुछ नहीं होगा. वैसे तो तुम्हारा चेहरा नहीं देखा है.. तो झूठ बोल देना कि कोई और लड़की लाए थे, उसको कर रहे थे. यही बात राज भी बोल देगा, वह समझ तो जाएगी, पर तुम बोलने को तो उसे बोल ही सकती हो.
मैं बोली- ठीक है अब जो होगा देखूंगी.
इसके बाद वे मुझे तीनों रगड़ रगड़ के अब चोदने लगे. जगत अंकल मेरे मुँह में तेजी से लंड डालकर मुँह को चोदने लगे. राज बहुत तेजी से मेरी गांड में अपना लंड डालकर अन्दर बाहर कर रहे थे. मेरी सांसें बहुत तेज हो गई थीं. मैं सब भूल गई कि अभी क्या हुआ था. इस वक्त मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं.
लगभग 5 से 7 मिनट जमकर रवि ने मेरी चूत को पेलम पेल चोदा, फिर अचानक मुझसे लिपट कर रवि मेरे दूधों को काटने लगे और बोले- आह.. रानी.. लगता है मेरा काम तो हो गया. मैं तो अब बहुत पागल हो गया हूँ
इतना कहते ही रवि के लंड का पूरा रस मेरी चूत में भर गया और रवि ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… आहह वन्द्या कुतिया बहुत मस्त माल है.. बहुत सेक्सी है..’ ऐसा हांफते हुए चिल्लाने लगे.
इधर जगत जोर जोर से मुँह में लंड डाले मुँह को चोदे जा रहे थे.
जगत अंकल ने बोला- आज तो तेरे मुँह में ही लंड रस डालूंगा वन्द्या.. मेरे लौड़े को आज जम के चूस और मस्त कर दे.
इतने में जगत ने पूरा लंड मुँह में अन्दर डाल दिया और जल्दी जल्दी अन्दर बाहर रगड़ने लगे. इधर राज अंकल भी मेरे बाल पकड़ कर जम के मेरी गांड में चोदने लगे थे और मुझे गाली देने लगे.
राज अंकल बोले- सोनू तू बहुत बड़ी रंडी बनेगी.. तेरे जैसा आइटम आज तक नहीं हुई. तुझे देखने से ही सब पागल हो जाते हैं. मैं बहुत लकी हूं जो तू मुझे मिली. मैं जवानी में तो तेरे मम्मी के सपने देखता था, पर तेरे बारे में सोचा भी नहीं था कि एक दिन सोनू तू मुझे मिलेगी. सोनू ऊपर वाले ने तुझे बड़ी फुर्सत से बनाया है.. गजब की चुदवाने का स्टैमिना भी दिया. क्या मस्त गांड है तेरी, दुनिया में कोई लड़की गांड में ऐसे नहीं चुदवा सकती, जैसे तू मस्त चुदवाती है और गांड में चुदवाते चुदवाते तेरी गांड भी मस्त हो गई है.. ले साली रंडी मेरी सोनू और ले जोर से..
राज अंकल ने कसके मेरे बाल पकड़ कर अपने लंड का गरम गरम लावा मेरी गांड में भर दिया.. और बोले- आहहहह सोनू तू तो लाजवाब है.. बहुत मस्त है.
वे मेरे पीठ पर पूरे चिपक गए. नीचे रवि थे, बीच में मैं.. ऊपर राज अंकल थे. सामने से जोर जोर से जगत अंकल भी मेरे मुँह में लंड से चोदने में लगे थे. मैं भी जोश में जगत अंकल का लौड़ा तेजी से चूसे जा रही थी.
तभी एकदम से एक मिनट बाद ही जगत अंकल के लंड का पूरा रस मेरे मुँह में पिचकारी की तरह आने लगा. मैंने उसे अंकल के माल को अन्दर पी लिया.. पूरा रस गटक लिया. बहुत अजीब तरह का टेस्ट था, पर मैं बहुत जोश में थी इसलिए पूरा लंड रस पी गई.
अब तीनों अंकल का काम खत्म हो गया था, पर मेरी चुदाई की प्यास नहीं बुझी थी, क्योंकि मेरी चूत का रस नहीं निकला था.
मैंने सोची अब यह अजीब मुसीबत है.
मैंने राज अंकल को बोला- मेरा काम नहीं हुआ मुझे और जमके चोदो.
रवि बोले कि अब हम लोगों को लंड खड़ा करने में टाइम लगेगा, तब तक रुकना ही पड़ेगा.
मैं बोली- नहीं आप लोग चलो.. फिर आगे जो भी होगा देखूंगी.
राज अंकल भी बोले- हां तेरी मम्मी वाली गाड़ी भी आगे निकल गई है.. सोनू चलते हैं.. फिर घर ही तो चल रहे हैं, तुझे ऐसे नहीं रहने देंगे.. कुछ न कुछ जुगाड़ हो जाएगा.
राज अंकल ने मेरे को एक कपड़ा दिया और बोले- इससे सब साफ कर लो.
जगत अंकल बोले- मुझे दे दो.. वन्द्या क्यों करे.. मैं साफ़ कर देता हूं.
रवि, जगत और राज अंकल ने अपने पूरे कपड़े पहन लिए. राज अंकल और जगत मुझे साफ करने लगे. उन्होंने मेरी चूत और गांड पोंछ पोंछ कर सब साफ कर दिए और मेरे कपड़े भी दिए. मैंने कपड़े पहन लिए.
अंकल ड्राइवर से बोले- अब चलो.
हम चलने लगे. जब मौसी के गांव के पास पहुंचे, तब मुझे बोले कि बिल्कुल अलग कॉर्नर में बैठ जाओ.
रवि मुझसे दूर बैठ गए और सब अपनी अपनी जगह जाकर बैठ गए. मौसी के दरवाजे में गाड़ी खड़ी हुई. मम्मी की गाड़ी पहले से वहां पहुंच गई थी. गाड़ी से उतर कर अन्दर मैं चली गई. मुझे मम्मी जरा सा दिखीं, पर उन्होंने मुझसे नजर नहीं मिलायी. मैं जाकर मौसी लोगों के पास बैठ गई.
मौसी ने मम्मी से बोला- क्या क्या लाई हो.. जरा दिखाओ.
थैलों में बहुत सारे कपड़े थे. मम्मी मेरी मौसी के लिए और उनकी लड़की, जिसकी शादी होनी थी, उसके लिए.. बहुत सारे कपड़े लेकर आई थीं.
मौसी और सारे लोग बहुत खुश हो गए. मौसी मम्मी को गले लगाने लगीं कि तू बहुत अच्छी है.. इतना खर्चा क्यों कर आई.
उन्हें क्या पता था कि मम्मी ने यह सब फोकट में जुगाड़ कर लिया. मेरे और अपने मजे लेकर और देकर.
इस तरह से हम लोग आ गए. अब उस दिन की शाम ढलने लगी, पर मेरे अन्दर की जो आग थी, वह अब तक बुझी नहीं थी. मैं चुपचाप लेट गई. मम्मी मेरे पास ही आकर लेट गईं. सफ़र और चुदाई की थकान थी. तो हम दोनों सो गए.
फिर अगले चार दिन कुछ भी नहीं हुआ. मेरी चूत भी कुलबुला रही थी. राज अंकल और जगत आगे पीछे भौंरे की तरह मंडराते रहे, पर दिन में आने जाने वालों की इतनी भीड़ रही कि कुछ होना सम्भव ही न था.
शाम से मम्मी मेरे पास आ जाती थीं. मम्मी ने जो उस दिन कार में देखा था. तो उसे लेकर उन्होंने मुझसे अब तक कुछ नहीं कहा था. पर उन्हें अब शक नहीं, पक्का यकीन हो चुका था कि मैं बिगड़ गई हूं. वो मेरे ऊपर नजर रखने लगी थीं. इसलिए भी मेरी चूत का कुछ जुगाड़ नहीं हो पाया.
इस तरह दिन निकल गए. अब शादी वाला दिन आ गया. मौसी की बेटी की शादी आज होनी थी. सब लोग बहुत बिजी थे. मैं मौसी की बेटी, जिसकी शादी थी और उसकी दो सहेलियां हमको मेकअप कराने ब्यूटी पार्लर बाहर जाना था. तो चले गए.
मैं उनके साथ थी, वहां से मैं भी सज धज के आई. शाम को ठीक 7:30 बजे सब के बीच बैठी थी. मैं जब से दुल्हन के साथ सजके आई, सारे मर्द और लड़के बस ऐसे मुझे घूरे जा रहे थे कि जैसे अभी के अभी खा जाएंगे. मैंने ब्लैक पिंक कांबिनेशन का लहंगा चोली पहना था.. जिसमें पूरा पेट दिख रहा था और हाई हील के कारण पीछे का इलाका भी बहुत निकला हुआ था. आगे सीने के उठ जाने से मेरे दूध कुछ ज्यादा निकल आए थे. आज मेरे समोसे से मम्मे आज बहुत बड़े लग रहे थे. सारे मर्द मेरी नाभि और बूब्स को एक टक घूर रहे थे. सच में आज लगता था कि मुझे ही मेरी नजर लग जाएगी.
सारी सहेलियां और वो मेरी मौसी की बेटी, जिसकी शादी थी. वह भी बोली कि सोनू आज तुझे देख कर ना जाने कितने मर्द बेहोश हो जाएंगे.. खुद को बचाना, कहीं कोई कंट्रोल ना कर पाया तो तुझे लेने के देने पड़ जाएंगे.
मैं मंद मंद मुस्कुराने लगी.
मैं वहां सब के साथ बैठी थी. वहीं राज अंकल अपना फोन लिए आ गए और बोले- सोनू फोन तेरे लिए. तेरा भाई बोल रहा है.. ले सुन उसे.
मैंने जैसे ही फोन लिया उधर से आवाज आई कि यह नंबर जो मानिकपुर में तुम्हारे साथ दुकान में आए थे, उनका ले लिया था. तुम्हारे अंकल है ना मैंने इनको तुम्हारा राखी वाला भाई बताया है. ध्यान से सुनो.. हमने बोला था कि आएंगे तो हम चार दोस्त आ रहे हैं. वो विदेशी नीग्रो भी दिल्ली से आ गए हैं, जिसका बोले थे. वह दोस्त भी आ ही गया. बस हम सब बारात में पहुंचने वाले हैं.
हम बारात की तरफ से आएंगे. वैसे भी कौन पहचानता है. हमने वहीं गांव में एक पहचान के मित्र हैं, उनके घर पर इंतजाम कर लिया है. बस एक घंटे तुम्हें गोल मारना है.. जो बोलोगी वह कर देंगे पर मना नहीं करना.
मैं बोली- मत आओ.. नहीं हो पाएगा.. मैं नहीं आ पाऊंगी, तुम वापस चले जाओ.. कुछ नहीं हो पाएगा.
वह बोले कि तुमने उस दिन स्टोर में करवाते हुए बोला था कि आ जाओ बुला लो अपने विदेशी को.. हमने तेरे ट्रस्ट में बुला लिया है. बड़ी बहुत दूर से आए हैं. मैंने तुम्हारी तारीफ करके बुलाया है.. और तुम्हारे कहने पर ही बुलाया है. वन्द्या ऐसा मत करो.
मैं फिर घबराने लगी कि इतनी बड़ी शादी के बीच कैसे हो पाएगा. मैंने फिर से कहा- नहीं मत आओ.. उस दिन बोलने के लिए सॉरी.. आज नहीं फिर कल परसों देख सकती हूं. अभी नहीं प्लीज अभी वापस चले जाओ.
ये कह कर मैंने फोन काट दिया.
इधर थोड़ी देर बाद बारात आने लगी, तभी मेरे पास अंकित और मौसी का बड़ा लड़का निहाल आए. दोनों ने मुझे एक किनारे बुलाया.
अंकित बोला कि आज तुम कयामत लग रही हो बहुत मस्त दुल्हन से भी सुंदर सबसे सुंदर सेक्सी लग रही हो. मैंने तुम्हारा पूरा यहां का कारनामा निहाल भैया को बता दिया है.. तभी से निहाल भैया तेरे लिए पागल हैं. हम आज तुम्हें दोनों करेंगे.
मैं बोली- हट..
निहाल बोला- सोनू, मैंने जब से सुना है कि तुमने यह सब किया है.. बस तभी से मैं तुम्हें ताक रहा हूं. आज तुझे मैं भी मस्त करूंगा.
मैं बोली- तू मेरा सगे भाई की तरह है.. तू मेरी सगी मौसी का लड़का है और अंकित तुम्हारे सगे चाचा का बेटा है. मुझे अच्छा नहीं लगेगा.
निहाल बोला कि मैं तेरी आज ही लूंगा.. बस तुम्हारे पीछे ही रहूंगा सोनू.. और आज मैं तुझे किए बिना नहीं मानूंगा.
तभी वहां से मौसी निकल कर बोलीं- भाई बहन में क्या खुसुर फुसुर चल रही है.. चलो उधर बारात आ गई है.. व्यवस्था और काम में लगो.
अंकित और निहाल दोनों चले गए. एक घंटे बाद बारात दरवाजे पे आ गयी. हम लड़कियां बारात देखने बाहर निकलीं.
डीजे में लगभग सभी बाराती नच रहे थे. आधे से ज्यादा दारू पिए हुए थे और लुढ़क रहे थे, वे नाचते गिर जाते. सबके सब ज्यादातर हम लड़कियों की तरफ घूरने में लगे थे, इशारे करने लगे और सीटी मारने लगे.
खैर हम लड़कियों को भी तो यही पसंद आता है. हम जो सजती संवरती बनती ही इसीलिए हैं कि मर्द लड़के हमें देख कर आहें भरें और हमारे लिए पागल हों. सच्चाई यही है.
इतने में तो 4-5 घराती तरफ से लोग गए और बारातियों को बोले कि लड़कियों को क्यों छेड़ते हो, उन लोगों से बातचीत भी हुई. इस तरह से दरवाजे पर बारात आ गई. अब द्वारचार की घड़ी आई. हम सब लड़कियां वहीं पहुंच गईं. कुछ लेडीज कलश के साथ खड़ी हो गईं. मैंने देखा कि कुछ बरात के लड़के हमारी तरफ बताशा फेंक रहे थे. उसमें तो कई को मैं भी देख रही थी कि वे सीधे मेरे दूध में बताशा मार रहे थे.
जब मैं उनकी तरफ देखूं. तो वो लोग आंख मार कर इशारा करे दे रहे थे.
मुझसे मम्मी बोलीं कि सोनू तू पीछे जाके खड़ी हो.
मैं पीछे जाकर खड़ी हुई तो वहां लेडीज के पीछे फिर जेन्टस और लड़के खड़े थे. अब मैं सबसे पीछे हो गई. उसके बाद जेन्टस लोग खड़े थे और फिर दीवार थी. मेरे आगे एक कुर्सी रखी थी. मैं उस पर हाथ रख कर टिक गई. उधर द्वारपूजा चल ही रही थी, तभी मेरे पीछे कूल्हों में कुछ चुभता हुआ एहसास हुआ. मैंने हल्के से घूम के देखा तो निहाल और अंकित खड़े थे. निहाल मुझसे सटा हुआ था और उसका ही लंड मेरे पीछे पेंट के ऊपर से ही टच हो रहा था.
वह धीरे धीरे अपने लंड को मेरे लहंगे के ऊपर से ही रगड़ रहा था. मैं कुछ बोल भी नहीं सकती थी क्योंकि वह मेरी सगी मौसी का बेटा था.. और उधर पीछे भी कुछ लड़के व जेंट्स खड़े थे. मैं चुपचाप खड़ी रही. वह अपने लंड का दबाव लगातार बनाता जा रहा था. अब मेरे कोई रिएक्शन या आपत्ति ना होने पर उसका विश्वास और हो गया और वह और मुझसे चिपक कर लोगों से नजर बचाकर मेरे पीछे गांड में चुपके से अपना हाथ भी लगाने लगा. उसकी यह हरकत धीरे धीरे मेरे अन्दर गर्मी और एक्साइटमेंट जगाने लगी, आखिर जवान लड़की हूं. किसी भी जवान लड़की के साथ ऐसे मर्द का छूना टच करना उसको गर्म करने लगता है.
निहाल की हिम्मत बढ़ती जा रही थी तो उसने अपनी हाथ की हरकत को और तेज कर दिया. उधर सब इतना सटे हुए थे कि किसी के नीचे तरफ कोई देख नहीं सकता था. इसका फायदा उठाते हुए निहाल ने अपना हाथ आगे तरफ मेरी नंगी पेट में नाभि में रख दिया. उसके छुअन से मुझे अजीब सा लगा. वो वहां पेट में नाभि में हाथ चलाता रहा और फिर धीरे से भीड़ का फायदा उठाते हुए उसने अपना हाथ और नीचे कर दिया. वो मेरे लहंगे के ऊपर से ही मेरी कमर के नीचे, जहां मेरी चूत है, वहां पर दबाने लगा. हाथ से चूत के पास रगड़ने लगा. पीछे गांड में उसका लंड चुभ रहा था और हाथ से मेरी चूत के पास दबा रहा था. हालाकि सब लहंगे के ऊपर से हो रहा था, पर अब बिल्कुल होश मेरा गुम होने लगा और मेरा पूरा ध्यान अब वहां द्वारपूजा से हटकर निहाल की हरकत पर नजर और ध्यान हो गया. मैं अब ज्यादा गर्म होने लगी और न जाने क्यों अपनी गांड पीछे उसकी तरफ अपने आप ही सटाने लगी.
तो शायद इससे वह समझ गया कि मुझे यह अच्छा लग रहा है इससे वह अब सीधे लहंगे के ऊपर से मेरी जहां चूत थी, वहां मुट्ठी से पकड़ कर निहाल दबाने लगा. उसके बाद तो जैसे उसे आजादी मिल गई हो. बिना किसी संकोच के अब जोर जोर से पीछे और आगे दबाव बनाने लगा. मैं भी उससे चिपकने की कोशिश करने लगी. मेरा वहां से ध्यान हटने लगा कि कौन आजू-बाजू है. यह सब अब मेरे साथ हो रहा था, सामने बैंड बज रहा था. लेडीज और जेंट्स सब का शोर इतना था कि किसी को किसी की कोई आवाज सुनाई नहीं देती थी.
तभी निहाल अब मेरे कान के पास बोला- सोनू तुझे मजा आ रहा है ना?
मैं कुछ नहीं बोली तो उसने आगे हाथ से चूत को फिर दबा दिया और बोला कि देखो मैं तेरे लिए पागल हो रहा हूं. इधर से कहीं और चल.. थोड़ी देर में आ जाएंगे.
मैंने नहीं में सिर हिलाया तो बोला कि अब मुझसे रहा नहीं जा रहा सोनू.. मैं यहीं खड़े खड़े ही डाल दूंगा, तू समझ ले तेरा भी तो मूड बन गया है. चल दस मिनट में आ जाएंगे.
मैंने फिर से ना में हाथ हिलाया तो उसने मुझे पीछे तरफ से कमर पकड़ के चिपका लिया और अपना लंड मेरी गांड में लहंगे के ऊपर से दबाने लगा. निहाल नया लड़का था, तो उसका लौड़ा बहुत बड़ा और कड़क महसूस हो रहा था.
यह सब हरकत चल ही रही थी कि इतने में अचानक लाइट गोल हो गई. बिजली क्या गोल हुई कि सभी शोर मचाने लगे पूरा अंधेरा हो गया था. कुछ भी नहीं दिख रहा था. लाइट गोल होने के आधे मिनट बाद ही निहाल वहीं पर सीधे बैठ गया और मेरे लहंगे के नीचे घुस गया.
मैं पीछे हाथ से उसे पकड़कर रोकने की कोशिश की, वह भी इस तरह से कि किसी को पता भी ना चले. पर निहाल नहीं रूका और लहंगे के नीचे घुस कर उसने सीधे मेरी पेंटी को वहां से पकड़ लिया जहां चूत थी. वो उसे जोर से मसलने लगा, मेरी हालत वैसे ही खराब थी. उसने पेंटी को इलास्टिक से पकड़कर खींचने लगा और उतारने लगा. वो मेरी पेंटी को मेरे पैरों के नीचे तक इतनी तेजी से लाया कि मैं कुछ नहीं कर सकी. उसने मेरी पेंटी को नीचे कर दिया. फिर मेरे पैर जबरदस्ती उठाकर पेंटी को निकाल दिया.
मैं लहंगे के नीचे बिना पैंटी के हो गई. अब भी निहाल मेरे लहंगे में घुसा हुआ था. उसने पहले मेरी पीछे गांड को थोड़ा सा फैलाया और जीभ से चाटने लगा.
मेरे सामने कुर्सी में रंजना दीदी बैठी थीं. वे मेरी बहन, जिसकी शादी थी.. उसकी सहेली थीं.
मैं उनसे लिपटने लगी. मैं बहुत ज्यादा गर्म होने लगी. इतने में मेरी टांगों को अपने हाथों से निहाल नीचे चौड़ा करने लगा और फिर बिल्कुल मेरे नीचे आकर मेरी चूत में अपनी जीभ को लगा दिया. जैसे ही निहाल ने जीभ को अन्दर किया.. मैंने सामने बैठी रंजना दीदी के सीने पर अपना हाथ रख कर दबा दिया.
अंधेरा तो था ही, रंजना मेरी तरफ घूम कर बोलीं- सोनू, तुझे क्या हो गया?
आपके कमेंट्स का इन्तजार रहेगा. कहानी जारी है.

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