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क्लासमेट गर्लफ्रेंड बन कर चुद गई Part - 1 ( Hindi Sex Story )

मैं अपने दोस्तों और सेक्सी भाभी और सभी जवान हॉट लड़कियों को धन्यवाद करता हूं कि वो सब मेरी स्टोरी पढ़ कर मेल करते हैं. कुछ लड़कियों और भाभियों ने मुझसे अपनी सेक्स लाइफ के बारे में भी जानकारी शेयर की और अपनी स्टोरी लिखने को बोला.
वो सब बाद में फिर कभी लिखूंगा, मेरे पुराने दोस्त और भाभियां तो मुझे और मेरे बारे में जानते हैं. जो नये लोग हैं उनको अपना परिचय दे देता हूं.
मेरा नाम यश है, मैं दिल्ली से हूँ और मेरी बी.ए. कंप्लीट हो गई है. मेरी 5.6 की हाईट है.
दोस्तो इतने दिनों से मैंने अपनी कोई स्टोरी नहीं लिखी, थोड़ा बिजी था और काफी ज्यादा टाइम भी हो गया है.
वो कहते है ना.. जब आपके दिन अच्छा हो तो सब कुछ अच्छा ही होता है.
मेरे बीए के सेकंड ईयर से लेके बी.ए. कम्पलीट होने तक, मुझे लड़कियों और भाभियों की चुदाई करने को बहुत मौके मिले.
मुझे तो खुद पर भी यकीन नहीं हो रहा था कि आखिर हो क्या रहा है. मैंने सोचा ही न था कि इतनी चुदाई करने को मिलेगी. पर ये भी था कि मैंने जिससे भी सेक्स किया, उससे फुल मस्ती की और हर बार मेरे पार्टनर को भी बहुत मजा आया.
तो ऐसे ही इस दौरान एक लड़की मिली, जिसका नाम मुस्कान था. उस दिन मैं सेकंड ईयर की बुक लेने में कॉलेज गया था. पर उस टाइम मैं अकेला ही गया था.. मेरा कोई दोस्त मेरे साथ नहीं था.
मैं बुक लेने के लिए लाइन में लगा हुआ था, वहां पहले से ही बहुत लड़कियाँ और लड़के लगे थे. लड़कियों और लड़कों की लाइन अलग से लगी हुई थी.
वहां पर भीड़ भी बहुत थी और जो लड़कियों की लाइन थी, वो हमारे उल्टे हाथ की तरफ थी. जो कॉलेज का छोटा गेट सीधे हाथ की तरफ था. वहीं से लोगों की एंट्री हो रही थी. कॉलेज में एंट्री करते ही 15 से 20 कदम की दूरी पर ही बुक लेने के लिए लाइन लगी हुई थी.
अब भीड़ होने के कारण जो भी कॉलेज में एंट्री कर रहे थे, तो उनको लाइन के बीच में से निकलना होता था. इस वजह से लाइन में लगे लड़के, लड़कियों पर.. और लड़कियां लड़कों पर नजर मार रही थीं.
मेरे पीछे लगे एक लड़के को बोल कर में गेट के पास की कैंटीन में पानी पीने चला गया.
तभी पीछे से एक लड़की प्यारी सी आवाज आई- एक्सक्यूज़ मी.
मैं पीछे मुड़ा तो उसको देख कर खुद पर काबू करना मुश्किल था. मुस्कान ने इस वक्त एक फुल फिटिंग की जीन्स, जो काले रंग की थी और सफेद रंग का टॉप पहना हुआ था. बहुत ही गोरा चिट्टा माल था. एकदम काली काली आंखें जिसमें काजल लगाया हुआ था. उसके फिगर का साइज 32-28-34 था.
मैं तो उसे ही देख रहा था, इतने में मुस्कान ने पूछा- बुक्स किस तरफ मिल रही हैं?
मैंने मुस्कान को उंगली के इशारे से बताया कि बुक्स वहां मिल रही हैं, पर उससे बात करते टाइम मैंने उसके हाथ में एक रिसीप्ट थी, जिससे बुक्स लेते हैं.. वो दिखी, उसमें मुझे बस उसका नाम ही दिखा, तभी वो चली गई.
मैं भी अपनी लाइन में जाकर लग गया. अब मेरी नज़र उसको ही ढूंढ रही थी. मुझे तो बस उसका नाम ही पता था. थोड़ी देर बाद मैंने मुस्कान को देखा उसके साथ उसकी 2 सहेलियां भी थीं.
वो बी.ए. सेकंड ईयर की लाइन में ही लगी थी. अब बुक लेने का मेरा नम्बर आने वाला था, पर मुझे उसे देखने और उससे बात करने के लिए कुछ करना था.
मैं लाइन से बाहर आ गया और सबसे पीछे जा कर लग गया. वो इसलिए, जो लड़कों और लड़कियों की लाइन थी, दोनों एक ही तरफ मुड़ी हुई थीं. मैंने देखा कि हमारी लाइन खत्म भी मुस्कान के पास ही हो रही थी तो मैं भी जाकर सबसे पीछे खड़ा हो गया.
जैसे ही मैं लाइन में लगा, मुस्कान की नज़र मुझसे मिली और हम दोनों हल्के से मुस्कुरा दिए. मैंने उससे हैलो कहा और उसने भी हैलो कहा. मैंने पूछा आप भी बी.ए. सेकंड ईयर में हो?
मुस्कान भी हां बोलते हुए सर हिला दिया.
मैंने ज्यादा बात करनी सही नहीं समझा कि कहीं वो सोचने ना लगे कि चेप हो रहा है. अब ऐसे ही मुस्कान कभी मुझे देखे और मैं मुस्कान को देख कर स्माइल करता.
ऐसे ही कब टाइम बीत गया और हम दोनों ने बुक्स ले लीं. हम दोनों अलग अलग चले गए. मैं मन में सोच रहा था यार अगर उसकी दोस्त उसके साथ नहीं होती, तो कुछ बात भी करता. फिर मैंने सोचा चलो यार चलते हैं, अब पता नहीं मिलेगी भी या नहीं.
फिर मैं मेट्रो स्टेशन पर आ गया और मैं टोकन लेकर फ्लेटफॉर्म पर मेट्रो का इन्तजार करने लगा. पता नहीं कब मुस्कान मेरे साथ आ कर खड़ी हो गई, मुझे पता भी नहीं चला. इस बार मुस्कान ने मुझे ‘हैलो..’ बोला मैंने भी आश्चर्य से उसे देख कर हैलो बोला.
मुस्कान मुझसे पूछने लगी कि आप भी बी.ए. सेकंड ईयर में हो?
मैंने कहा- हां.
वो मुस्करा दी.
इतने में मैं बोला- आपकी फ्रेंड्स कहां हैं?
मुस्कान ने कहा कि उनको कुछ काम था और उनको उसमें देर हो जाती, इसलिए मैं अकेले ही चली आई.
इतने में ट्रेन आई तो हम दोनों सवार हो गए.
मुस्कान फिर बात करते हुए बोली कि आपने सब्जेक्ट कौन कौन से लिये हैं?
मैं- मैंने तो हिंदी, हिस्ट्री, इंग्लिश, और एजुकेशन लिए हैं और आपने?
मुस्कान बोली- मेरे भी ये ही सब्जेक्ट हैं. बस हिस्ट्री में थोड़ी दिक्कत होती है.
मैंने कहा- अच्छा पर मुझे तो हिस्ट्री सब्जेक्ट बहुत अच्छा लगता है.
वो मुस्कुरा दी, तो मैं बोला- अगर आपको कोई हेल्प चाहिए होगी तो आप मुझसे ले सकती हो.
वो बोली- ओके.
फिर मैंने उसको अपना नम्बर दिया उसने मेरा नाम पूछा, तो मैंने कहा मेरा नाम यश है.. और आपका?
उसने कहा कि मेरा नाम मुस्कान है.
मैंने पूछा- आप व्हाट्सएप यूज़ करती हो?
तो मुस्कान बोली- हां.
ऐसे ही थोड़ी देर बात करने के बाद उसका स्टेशन आ गया और वो चली गई.
फिर मैं जैसे ही घर पहुंचा, एक मैसेज आया. उसमें हाय लिखा हुआ था.
मैंने रिप्लाई किया- हाय.. आप कौन?
वहाँ से रिप्लाई आया- आप यश हो?
मैंने कहा- हां मैं यश हूँ.. औऱ आप कौन?
वैसे मुझे लग रहा था कि ये मुस्कान है क्योंकि मैंने उसका नम्बर नहीं लिया था.
रिप्लाई आया- मैं मुस्कान हूँ.
बस अब मेरी उससे बात होने लगी. कुछ एक हफ्ते ही हुआ होगा कि उससे मेरी कॉल पर भी बात होने लगी. वो मुझसे बात करते हुए काफी खुश रहती थी. ऐसा वो मुझे बोलती थी.
इसी तरह कुछ दिन बीत गए और हम दोनों काफी अच्छे दोस्त बन गए थे, तो मैं उससे डबल मीनिंग बात भी कर लेता तो वो मेरी बात को हंसी में उड़ा देती.
ऐसे ही एक दिन उसका सुबह सुबह कॉल आया. मैंने कॉल उठाया तो मुस्कान बोली- यश यार मुझे कॉलेज जाना है और मेरी कोई भी दोस्त फ्री नहीं है तो क्या तुम चल सकते हो?
मैंने मन में सोचा कि फंस गई क्या. फिर कहा- ओह्ह यानि आज तो डेट पर चलना है.
मुस्कान बोली- ठीक है तुम जो भी समझो.
मैंने कहा- ठीक है.
उसने मुझे बताया कि दस बजे तक इस स्टेशन पर आ जाना. मैं भी टाइम से पहुंच गया. कुछ ही देर में मुस्कान आ गई.
कसम से दोस्त क्या मस्त पटाखा माल लग रही थी. इस वक्त मुस्कान ने लाल रंग का सूट पहन हुआ था और वो भी एकदम कसा हुआ.. उसके चूचे कमर पूरी बॉडी.. एकदम झक्कास लग रहा था. ऊपर से उसने काजल लगा रखा था और बालों को खुले रखा था.
उसे देखते ही बस मन किया कि अभी इसको गोद में उठा कर इसकी चुदाई कर दूँ, पर जैसे तैसे अपने ऊपर कंट्रोल किया.
मुस्कान आई मुझसे हाथ मिलाया. आज फर्स्ट टाइम इतने मुलायम हाथ मिलाये थे मेरा उसको छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था.
मुस्कान बोली- अब चलें या.. फिर ऐसे ही खड़े रहोगे.
अब हम कॉलेज पहुंच गए और मुस्कान का काम होने के बाद मुस्कान बोली- चलो अब घर.
मैंने कहा- यार ये तो गलत बात है, मैं तो डेट पर आया था.
तो मुस्कान बोली- अच्छा बोलो कहां चलना है.
मैंने कहा- ज्यादा दूर नहीं है, यहीं पास में एक कपल पार्क है, उसमें ही चलते हैं.
पहले तो उसने मना किया, फिर कुछ देर मनाने के बाद हां बोला. मैं उससे मस्ती करने के लिए कभी उसके कंधे पर हाथ रखता, तो कभी उसके हाथ को सहलाता. पार्क में पहुंचने पर देखा कि उधर बहुत सारे कपल थे. थोड़ा जंगल जैसा पार्क था और अन्दर जाने के बाद कुछ ही दूर गए होंगे तो झाड़ी के पीछे से ‘अअहहहहह… ऊऊहहह..’ की आवाज आ रही थी.
मैंने कहा- देखो किसी को तो डेट पर आने पर कितना प्यार मिल रहा था है.. और एक मैं हूँ.. डेट पर तो आया हूँ, पर प्यार के नाम पर एक किस तक नहीं मिली.
मेरी इस बात पर मुस्कान शर्मा गई. अब मैंने उसका हाथ थोड़ी टाइट पकड़ लिया. वो शायद उस टाइम थोड़ी गरम हो रही थी. अब हम पार्क के काफी अन्दर आ चुके थे और आस पास कोई भी नहीं था.
मैंने कहा- मुस्कान कोई नहीं है.. क्या हम भी शुरू हो जाएं?
तो मुस्कान बोली- चुप हो जाओ.
पर उसको ये सब अच्छा लग रहा था. मुस्कान अपने बैग में से चिप्स का पैकेट निकाल कर खाने लगी. इतने में एक बंदर आया और उससे चिप्स छीन कर भाग गया. इस हादसे से मुस्कान इतना डर गई कि वो डर के मारे मुझसे कसके चिपक गई. उसके इतनी तेज से चिपकने से मेरा मन तो मन ही नहीं कर रहा था कि उससे अलग होऊं.
वो मुझसे इतनी तेज से चिपकी हुई थी कि उसकी चूत से मेरे लंड सट गया था. मैंने भी सोच लिया कि इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा.
मैंने भी मुस्कान को और कसके अपनी बांहों में दबा लिया और उसकी पीठ पर हाथ से सहलाने लगा.
उसकी साँसें डर के मारे तेज चल रही थीं. मैंने हल्के से अपना हाथ आगे करके उसके एक चूचे को दबाने लगा और अगले ही पल उसके होंठों को अपने होंठों में दबा कर जोर जोर से चूसने लगा. शायद उसे भी ये सब अच्छा लग रहा था. वो अभी भी मुझसे ही चिपकी हुई थी.
अब वो हल्का हल्का मुझे छोड़ने सी लगी, तो मैंने और कसके उसको अपने पास दबा लिया.
अभी भी मैं एक हाथ उसके पीठ को ही सहला रहा था और एक हाथ से उसके पेट को भी सहलाने लगा. जिससे वो और गर्म होने लगी.
ऐसे ही कुछ पल के बाद मैंने जैसे ही उसकी चूत पर हाथ रखा, तो वो अलग हो गई.
मैंने कहा- आओ ना यार.
उसने कहा- नहीं, ये गलत है.
मैंने भी ज्यादा जोर नहीं दिया. वो अब मुझसे नज़र भी नहीं मिला रही थी और न ही मुझसे बात कर रही थी.
हम उधर से वापस हो लिए. मेट्रो में बैठे और वो अपने स्टेशन पर बिना कुछ कहे ही उतर कर चली गई.
मैंने घर जा कर उसको व्हाट्सएप पर सॉरी बोला, उसका कोई जवाब ही नहीं आया.
दो दिन हो गए, उसका कोई मैसेज नहीं, कोई बात नहीं.. मैं उसको कॉल भी करता तो उठाती ही नहीं थी.
ऐसे ही मैंने सोचा कि यार गलत टाइम पर शुरू हो गया औऱ शायद मैंने जल्दी कर दी.
फिर एक हफ्ते बाद मुस्कान का कॉल आया. मैंने मुस्कान से सॉरी बोला तो मुस्कान बोली- कोई बात नहीं.
और अगले ही पल में उसने वो बोल दिया, जिसकी मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी.
मुस्कान बोली- यश मुझे तुमसे कुछ बोलना है और अगर तुमको अच्छा ना लगे तो सॉरी.
मैंने कहा- बोलो ना क्या बात है?
मुस्कान बोली- यश आई लव यू.
मैं तो पूरा सुन्न हो गया.. साला आखिर हो क्या रहा है. उसकी इस बात पर मेरी तो आवाज ही नहीं निकल रही थी. मुस्कान फिर से बोली- यश कुछ बोलो ना?
मैंने भी बोल दिया- आई लव यू टू मुस्कान.
फिर उसने मुझे बताया कि उस दिन जो भी हुआ, उससे मुझे गुस्सा तो बहुत आया कि तुमसे बात ना करूँ, पर पता नहीं क्यों मुझे वो गुस्सा भी आया और जो तुमने किया, वो सब अच्छा भी लगा.
अब क्या था.. बस मुझे तो इतना ही सुनना बहुत था. अब तो लड़की भी पक्की हो गई थी. उस दिन के बाद हम रात रात भर सेक्स की बात करते.
इस बीच उसने ये भी बताया कि उसने पहले भी 2 बार सेक्स किया था.
फिर मैंने एक दिन मुस्कान से पूछा कि जानू अब एक डेट पर चलें, अब बहुत मन हो रहा है प्यार करने का.
तो उसने बोला कि उसे पार्क में ये सब अच्छा नहीं लगता.
मतलब उसे भी लंड चाहिए था. ये सोच कर ही मेरा लंड भी अंगड़ाई लेने लगा कि आज एक नई चूत का स्वाद मिलने वाला है.
फिर एक प्लान तैयार करके मैंने होटल में एक रूम बुक करवाया और मुस्कान को लेने के लिए हर बार की तरह मेट्रो स्टेशन पहुंच गया. हम दोनों मेट्रो स्टेशन पर मिलते थे और एक साथ आने वाली दूसरी मेट्रो में चढ़ जाते थे. ये इसलिए करते थे ताकि हम दोनों मिल सकें वर्ना ऐसे तो मेट्रो में उसको खोजना ही मुश्किल होता था.
मैं उसका बेसब्री से इन्तजार कर रहा था. पर मुझे क्या पता था कि आज तो वो कुछ अलग ही बन के आएगी.
यार सच में एकदम प्यारी सी मासूम गुड़िया जैसी लग रही थी. मुस्कान ने एकदम सिंपल सूट पहना था, जो पूरा ही सफेद रंग का था. हमेशा की तरह आंखों में काजल, होंठों पर गुलाबी रंग की लिपस्टिक लगा रखी थी और बालों को खुला छोड़ कर एक तरफ डाल रखा था.
बस उसको देख कर ये लग रहा था कि कब रूम में पहुंच जाएं और कब मैं मुस्कान को पटक पटक कर चोद दूँ. ऊपर से वो आज इतनी प्यारी स्माइल कर रही थी कि बस मुझसे रहा ही नही गया. मैंने हाथ पकड़ कर उसे अपने पास खींचा और खुद से चिपका लिया.
अब हम मेट्रो में आ गए थे. करीब एक घंटे बाद हम दोनों होटल में पहुंचे. ये होटल भी काफी अच्छा था. होटल पहुंचने के बाद हम अपने रूम में आ गए.
जैसे ही रूम में पहुंचे, मैंने दरवाजा किया बन्द किया और मुस्कान को गोद में उठा कर दीवार से लगा दिया. अगले ही पल मैंने मुस्कान के होंठों पर अपने होंठों को रख कर उसके कोमल मीठे होंठों के रस को चूसने लगा.
मुस्कान अपना मुँह हटा कर बोली- यश बेबी थोड़ा फ्रेश हो जाने दो.. फिर तो अभी हूँ ही ना तुम्हारे पास.
मैंने कहा- नहीं मुझे अभी रोको मत मेरी जान.
मुस्कान बोली- प्लीज़ मान जाओ ना.
मैंने कहा- ओके पर एक शर्त पर.
मुस्कान बोली- शर्त..! ओके बोलो क्या शर्त है?
मैंने कहा- हम दोनों ही बाथरूम में अन्दर जाएंगे ओके?
थोड़ा सोचने के बाद मुस्कान बोली- ओके ठीक है.
मैंने उसको नीचे उतारा और अब मैं उसके सूट को उतार रहा था और साथ में ही उसके चूचों को भी सहला रहा था. उसके कुर्ता को उतारा ही था कि समझो मैं तो एकदम बुत बन कर ठगा सा रह गया. पहली बार लाइव उसको एक छोटी सी ब्रा में देख रहा था.. उसने सफेद रंग की ब्रा पहनी हुई थी, जो उसके मम्मों को आधे से ज्यादा खुला करके दिखा रही थी.
फिर मैंने देर ना करते हुए उसकी सलवार का नाड़ा खींचा तो सलवार भी माफ़ी मांगते हुए उतर गई.
उसने नीचे पैंटी भी सफेद रंग की पहनी थी. अब मुस्कान बस ब्रा पैंटी में मेरे सामने थी.. ऊपर से उसका गोरा रंग.. माशाअल्लाह क्या हुस्न दिख रहा था. मेरा लंड तो कड़क होकर सलामी दे रहा था. मैंने भी जल्दी से अपने कपड़े उतार दिए. ये देख कर वो शर्मा रही थी.
मैंने कहा- शर्माती क्यों हो रानी.. जरा रुको, अभी सारी शर्म दूर कर देता हूं.
मैंने जल्दी से उसको उठा कर बेड पर लेटा दिया.. और ऊपर से नीचे तक उसे चूमने लगा. इसी बीच मैंने मुस्कान की ब्रा पैंटी दोनों ही उतार दी.
उसकी सफाचट चूत देख कर लगता ही नहीं था कि वो एक भी बार चुदी हो, अभी भी एकदम टाइट और गीली हुई पड़ी थी.
मुस्कान की चुत चुदाई की कहानी का रस आपको मजा दे रहा होगा. आप मुझे ईमेल कीजिएगा. अगले भाग में आपके सामने मुस्कान की चूत और गांड दोनों छेद खोल कर मजा दूँगा.

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