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कमसिन लड़की की चाहत Part - 7 ( Hindi Sex Story )

अब तक की इस चुदाई की कहानी में आपने पढ़ा था कि रोहण चाचा के साथ उनके दो और साथी भी मुझे चोदने के लिए तैयार हो उठे थे.
अब आगे..
मनोहर ने मुझसे लिपट कर मेरे होंठों को ऐसे जोर से चूमा कि मेरी सांस ही रुक गई. उसके मुँह से गंध आ रही थी. पर वो इस अंदाज मेरे होंठों को चूमने लगा कि मैं मनोहर से ना चाहते हुए लिपट गई और उसका साथ देने लगी. वो मेरे होंठ चूसने लगा और मेरे मुँह के अन्दर अपनी जीभ डाल कर अपनी जीभ से मेरे जीभ को चूसने और चाटने लगा. मनोहर का लंड मेरी जांघों के बीच में ऐसे चुभ रहा था, जैसे कोई लोहे का रॉड हो. उसका लंड एकदम सख्त लौड़ा था. मैं जानबूझ कर मनोहर से सट गई, चिपक गई.
तभी चाचा बोले- सुनो दिनेश और मनोहर, अब वन्द्या बिल्कुल तड़पने लगी है.. बहुत चुदासी हो गई है. देखो वन्द्या खड़े-खड़े कांप रही है, इसका बहुत मन करने लगा है. इसे जल्दी नहीं चोदेंगे तो पागल हो जाएगी.
तभी दिनेश ने बोला- सच है चाचा, अब इसे यहीं लिटा देते हैं, इसे लिटाकर फिर मस्त चोदने के लिए पोजीशन बनाते हैं.
तीनों थोड़ा थोड़ा हट गए. चाचा मुझसे लिपटे लिपटे बोले कि चल वन्द्या डार्लिंग अब लेट जा, अब अपन मस्त चुदाई का खेल शुरू करते हैं.. वाइल्ड सेक्स करेंगे.
उन्होंने मुझे कमर से पकड़ कर वहीं फर्श पर पड़ी रजाई में लिटा दिया. जैसे ही मैं लेटी, चाचा ने मेरे दोनों चूतड़ों को फैला कर गांड के छेद को खोला और जोर जोर से गांड चाटने लगे. उन्होंने मेरी गांड में अन्दर तक अपनी जीभ घुसा दी. मैं जीभ की खुरदुरापन महसूस करके एकदम से उछल पड़ी. करीब पांच मिनट तक चाचा मेरी गांड में जीभ घुसेड़ कर उसको पागल कुत्ते की तरह चूसते रहे.
मैं बोली- चाचा मैं मर जाऊंगी मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा कुछ करो.
दिनेश के बदन में कुछ कपड़े थे, वह भी उसने पूरे उतार दिए और पूरा नंगा हो कर मेरे सामने तरफ आ गया.
तभी मनोहर ने अपना लौड़ा मेरे मुँह के पास लाकर बोला- साली छिनाल वन्द्या, चल आज मेरे लंड को इतना चूस.. और ऐसे चूस की सभी रंडियां फेल हो जाएं.
यह कहते हुए मेरे बाल पकड़ कर अपना लंड मेरे मुँह में घुसाने लगा. मनोहर का लंड बहुत बड़ा था.
जब मैंने मुँह नहीं खोला तो चाचा बोले- मुँह खोल दे वन्द्या, मनोहर जैसे लंड लड़की को बड़े भाग्य से मिलता है, तू पागल हो जाएगी इसके लंड को चूस कर.. और इससे चुदवा कर, यह बहुत मस्त चुदाई करता है.. बड़े अच्छे से चुदाई करेगा.
मनोहर ने मेरे दोनों मम्मों को पकड़ के इतनी जोर से दबाया कि ऐसा लगा, जैसे मेरी जान निकल गई.
मैं उससे बोली कि ऐसा मत करो यार.. बहुत दर्द हो रहा है. ये कहने के लिए मैंने जैसे ही अपना मुँह खोला तो मनोहर ने अपना लंड मेरे मुँह में अन्दर घुसा दिया.
जैसे ही लंड घुसा मनोहर कराह भर कर बोला- आह.. वन्द्या मेरी जान चल अब इसे चाट और चूस.. क्या मस्त होंठ और मुँह है तेरा.. जिसपे मेरा लंड घुसा है, चल रंडी चूस इसे..
उसने मेरे बालों को पकड़ कर पूरा लंड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया. उधर दिनेश ने नीचे मेरी टांगों को फैला दिया. मेरी चूत को पूरा खोल दिया, फिर बड़े ही ध्यान से देखने लगा.
उसने मेरी चूत में उंगली और हाथ रख कर कहा- चाचा ऐसी गुलाबी मस्त चूत मैंने अपनी जिंदगी में नहीं देखी.. जैसी वन्द्या की चूत है. साली की चूत बिल्कुल मक्खन हो रखी है. सच में चाचा तुमने क्या माल पटाया है. चाचा, आज आपने तो हम दोनों की किस्मत बना दी, मैं तो कहूंगा कि वन्द्या को आप अपनी परमानेंट अपनी रखैल बना लो, इसकी मम्मी का चक्कर छोड़ो, जो करना है इसी के लिए किया करो. पैसे कपड़े और भी सामान वन्द्या को ही सीधे दिया करो. अब इसकी मम्मी को रहने दो, वो खटारा हो चुकी है. वन्द्या, तुम चाचा की रखैल बन जाओ, मालामाल हो जाओगी.
ऐसा कहते हुए दिनेश मेरी चूत को बहुत जोर जोर से चाटने लगा. जैसे ही दिनेश ने मेरी चूत में अपनी जीभ को डाला, मुझे जाने कैसा सुरूर होने लगा कि मैं इतना उत्तेजित होने लगी कि बता नहीं सकती. मैं अपने आप अपनी कमर को उछालने लगी और मनोहर का लंड पूरा का पूरा मुँह में अन्दर-बाहर करने लगी.
चाचा बोले- वन्द्या, मैं तेरी मम्मी को बहुत चोदता हूं, ये बात मुहल्ले और गांव में सबको पता है कि तेरी मम्मी मेरी रखैल की तरह है. पर तेरी मम्मी के और भी यार हैं, सब पैसे वालों को तेरी मम्मी फंसा के रखती है. आज से जैसा दिनेश बोलता है, तू वैसा ही कर ले, तू मेरी रंडी और रखैल बन जा, तेरा पूरा खर्चा मैं उठाऊंगा. पढ़ाई से लेकर हर बात का तेरे पहनने, घूमने तुझे खर्च के लिए पैसे भी दूंगा. तुझे बहुत मजा आएगा, तुम देखना हम तीनों मिलकर तुम्हें जन्नत का मजा हमेशा देते रहेंगे और मैं तुझे अलग-अलग एक से एक कड़क लंड दिलवाता रहूंगा. तुम उन नए लड़कों को भूल जाओगी, जिनसे अभी चिपकी थी. ये नये लड़के किसी काम के नहीं होते, फ्री में चोदना जानते हैं बस. कभी तुम्हें कुछ काम पड़ जाए, तो ये दूर भाग जाते हैं, जैसे अभी भाग गए थे. उस वक्त सिर्फ हम लोग ही काम आएंगे.
मैं फुल पागल हो रही थी क्योंकि मुँह में मनोहर का लंड पूरा घुसा था, दिनेश चूत बेहद गंदे तरीके से चाटने में लगा था, चाचा मेरी गांड को फैलाए चाटे जा रहे थे.
मैंने मनोहर का लंड मुँह से निकाला और चाचा से बोली- चाचा जो भी आप मम्मी को, मेरे लिए देते हो और जैसा आपका मम्मी से रिश्ता है, उसे देते रहना.. और वैसा ही रिश्ता मम्मी से बनाए रखना. मैं अपनी मम्मी को बहुत मानती हूं, मेरे हिस्से का भी सब मम्मी को ही दे दिया करना. मेरे और आप लोगों के बीच का ये रिलेशन किसी को भी पता नहीं लगना चाहिए. सच में आप तीनों बहुत मस्त हो, मुझे जाने कैसा लग रहा है.. मुझे अब होश नहीं है. बहुत अलग तरह का मजा आ रहा है, बस चोरी से चुपके चुपके कैसे भी मुझे ऐसा ही आप तीनों रोज ऐसे ही मुझे जमकर चोदना, चूमना और चाटना. चाचा अब कुछ ऐसा करो कि मेरे शरीर की ये जलन ये आग बुझ जाए. मैं बहुत ही छोटी हूं, ये रखैल क्या होती है, ये सब नहीं जानती हूं. अभी बस सेक्स कहानियों में चुदाई की मस्ती को पढ़ा है.. रंडी और रखैल के बारे में पर जो भी हो, ये मुझे आप तीनों जल्दी से जमकर कुछ करो. आज से मैं आप लोगों की रंडी भी हूं और रखैल भी बन गई हूँ.. जो भी बोलो वो सब हो गई हूँ.
तभी मनोहर बोला- वन्द्या तू तो बहुत मस्त है.. साली इतनी छोटी उम्र में तू रंडी और रखैल बन गई. आगे तो तू सबको बेहाल कर देगी, मेरे दो मजदूर भाई हैं.. उनके लंड बहुत लम्बे चौड़े हैं. उनसे तुझे एक बार जरूर चुदवाऊंगा. वो दोनों आधे आधे घंटे तक लगातार चोदते हैं. उनका लौड़ा मेरे हाथ के बराबर मोटा और लम्बा लौड़ा है. उनसे चुदाई कर चुकी सब औरतें कहती हैं कि वो दोनों इंसान नहीं, जानवर हैं.. औरतें और लड़कियां उनसे चुदने को तरसती हैं.
मैं पागल हुए जा रही थी, मुझे होश नहीं था. मैं बोली- मनोहर, अभी बुला उन दोनों को.. मुझे उनसे अभी चुदवा दो, मुझसे रहा नहीं जा रहा.. बुलाओ अभी.
चाचा बोले- मनोहर, ये वन्द्या पागल हो चुकी है.. इसकी बातों में मत आना. अभी उन दोनों को नहीं बुलाया जा सकता है वन्द्या.. अभी तो आज हम तीनों ही तेरे चूत और गांड की खुजली मिटायेंगे और देख हम तीनों ही तुझे जन्नत से भी ज्यादा मजा अभी दिए देते हैं.
ऐसा कहकर चाचा ने पीछे मेरी गांड के छेद के लिए मेरे दोनों कूल्हों को फैला दिया और गांड में उंगली धीरे धीरे चलाने लगे.. साथ ही वे मेरी पीठ को अपने होंठों से चूमते रहे.
तभी दिनेश अपनी दो उंगली मेरी चूत में डालने लगा और धीरे से अन्दर घुसा दिया. जैसे ही चूत में दिनेश की उंगली घुसी. मैंने फिर से मनोहर का लौड़ा पूरा पकड़ कर खींच लिया और मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगी.
दिनेश इतनी जोर से चूत में उंगली चलाने लगा कि मुझसे रहा भी नहीं जा रहा था. इसलिए मनोहर का पूरा लंड अपने दांतों से काटने लगी, चूसने लगी.
मनोहर बोला- अरे चाचा यह तो पागल हो गई.. मेरा लंड लगता है, खा ही लेगी.
चाचा बोले- हां बिल्कुल सही बोल रहा है तू.. आज इसको संभालना मुश्किल होगा. तुम इस चुसाई को दिक्कत मत मानो.. इसको लंड चूसने दो, खाने दो. इस दिनेश ने वन्द्या को पागल कर दिया है.. देखो कितना जोर जोर से चूत में दो दो उंगलियां डाले अन्दर बाहर चला रहा है. साथ में चूत भी चाटते जा रहा है. अरे वन्द्या नई लड़की है, पागल नहीं होगी तो क्या होगी. उसमें भी कोई कोई लड़की के अन्दर बहुत ज्यादा सेक्स की इच्छा होती है, उन लड़कियों में से है ये वन्द्या.
दिनेश के द्वारा मेरी चूत में उंगली करने और चूत चूसने से मैं जोर जोर से हांफने लगी, मेरी सांसें तेज होने लगीं.
चाचा बोले- अब मुझसे रहा नहीं जा रहा और मैं वन्द्या की गांड में लंड डाल रहा हूं.
उन्होंने मेरे कूल्हों को फैला कर गांड को चाटना शुरू किया. मुझे बहुत गुदगुदी होने लगी. अब चाचा ने अपना लंड निकाल कर मेरी गांड पर रखा.
चाचा ने बोला- वन्द्या, देखना मैं तेरी गांड में डाल रहा हूं.
उन्होंने पीछे से मेरे बाल पकड़ कर अपना लौड़ा मेरी गांड में सैट किया. जैसे ही चाचा का लंड मेरी गांड के छेद में टच हुआ, मुझे बहुत अजीब सी फीलिंग हुई. मन में लगा कि सीधे अन्दर घुसा दें, पर मैं यह बोल नहीं पाई.
परन्तु चाचा ने जैसे मेरे अन्दर की आवाज को सुन लिया हो, वो मुझसे बोले- बहुत ही मस्त माल है तू वन्द्या.. और तेरी गांड का तो कहना ही क्या, अब मैं तेरी गांड को चोदने जा रहा हूं.
यह कहते हुए मेरी गांड में अपना लौड़ा घुसाने लगे. जैसे ही अन्दर लंड गांड में घुसने लगा, इतना तेज दर्द शुरू हुआ कि असहनीय.. मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती.
मैं बोली- चाचा बहुत दर्द हो रहा है.. बाहर निकाल लो अपना लंड.. मुझे नहीं करवाना.
पर चाचा ने मेरी एक नहीं सुनी और अपने लंड का दूसरा झटका बहुत तेजी से मेरी गांड में मारा.. और इस झटके में उन्होंने अपना आधा लौड़ा घुसेड़ दिया. इधर मनोहर ने अपना लंड मेरे मुँह में घुसा दिया, जिससे मेरी आवाज़ अब निकल नहीं पा रही थी.
परन्तु मेरी गांड में मुझे बहुत दर्द हो रहा था, लंड मेरे मुँह में था तो मेरी आवाज भी नहीं निकल पा रही थी.
चाचा मेरे दूध मसलते हुए बोले- तुम लोग ऐसे में बहुत टाइम लगाओगे, वन्द्या पागल हो रही है.
चाचा मेरी गांड में अपना लंड जोर से घुसा रहे थे, पर अब तक वे आधा ही लंड घुसा सके थे. मैं दर्द के मारे मनोहर से लिपट गई और जोर से रोने लगी. मेरी आंखों से आंसू निकलने लगे. मेरी गांड में चाचा के लंड घुसने पर बहुत दर्द हुआ था. चाचा ने मेरी कमर पकड़ी और मुझसे लिपटे रहे. पर मेरे दर्द को देखते हुए उन्होंने अपने लंड को मेरी गांड से थोड़ी देर के लिए बाहर निकाल लिया.
अब चाचा ने मनोहर को बोला कि तू वन्द्या की चूत में अपना लंड डाल.. क्योंकि तेरा लौड़ा बहुत बड़ा है और हर लड़की बड़े लंड से ही चुदाई करवानी पंसद करती है.
फिर चाचा दिनेश को बोले- तू दिनेश वन्द्या के मुँह में अपना लौड़ा डाल देना ताकि ये चीख न पाए.
यह कहकर चाचा ने एक बार फिर अपना लंड जोर से मेरी गांड में घुसेड़ दिया. मैं फिर से दर्द से तड़पने लगी.
चाचा बोले- दिनेश तू सामने की तरफ है, इसलिए वन्द्या के दूध को कस कर दबा और मसल कर चूस.
तभी दिनेश उठा और अपना मुँह मेरी चूत से हटा कर मेरे दोनों मम्मों को पकड़ कर मसलने लगा. वो अपने दोनों हाथों से और बहुत मस्त तरीके से मेरे मम्मों को दबाने लगा. उसने मेरे बाएं चूचे को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा.

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